कोरोना इफेक्ट: OPEC देशों की इमरजेंसी बैठक 6 अप्रैल को, कच्चे तेल पर होगी बात

कोरोना वायरस के प्रकोप से दु​नियाभर की इकोनॉमी पस्त नजर आ रही है. इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है. ऐसे में कच्चे तेल के प्रमुख उत्पादक व निर्यातक देशों के मंच ओपेक की इमरजेंसी बैठक होने वाली है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही ये बैठक 6 अप्रैल को होगी.


इस बैठक में रूस की अगुवाई वाले अन्य प्रमुख खनिज तेल उत्पादक देशों के समूह भी शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच फोन पर बातचीत के बाद यह बैठक बुलाई गई है.


क्या है मकसद?


इस बैठक को बुलाने का मकसद कच्चे तेल की कीमतों में सुधार लाना है. दरअसल, सऊदी अरब ने कहा है कि वह कच्चे तेल के बाजार में स्थिरता लाना चाहता है. बीते दिनों रूस-सऊदी अरब के तेल उत्पादन बढ़ाने की घोषणा से तेल बाजार में कीमतें बुरी तरह टूटी है.


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इसके अलावा कोरोना वायरस के प्रकोप से कच्चे तेल की मांग में भी कमी आई है. यही वजह है कि इस साल की शुरुआत से कच्चे तेल के दाम दो-तिहाई यानी 66 प्रतिशत से अधिक टूट चुके हैं. हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर उम्मीद जताई है कि रूस और सऊदी अरब उत्पादन में कटौती कर कीमत युद्ध को समाप्त कर सकते हैं.



 


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कटौती का नहीं मिल रहा फायदा


अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी कच्चे तेल के भाव कम होते हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सस्ती हो जाती हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है. आम लोगों को इस कटौती का फायदा नहीं मिल रहा है.


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दरअसल, नए वित्त वर्ष में देश की तेल कंपनियों ने यूरो- छह मानक पेट्रोल, डीजल की आपूर्ति शुरू कर दी है. ये हाई क्वॉलिटी का ईंधन माना जाता है. तेल कंपनियों का कहना है कि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम में एक रुपये लीटर की वृद्धि होनी चाहिये थी लेकिन कच्चे तेल की कटौती को देखते हुए बिना मूल्य बढ़ाए यह स्वच्छ ईंधन देना शुरू किया है. इससे पहले सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल पर तीन रुपये प्रति लीटर के हिसाब से एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी गई है.